11/21/2007

समरभूमि नंदीग्राम है

समरभूमि नंदीग्राम है

क्रंदित है इस देश की भूमि, समरभूमि नंदीग्राम है।

हर बाला बेबस की प्रतिमा, आतंकित हर जन है॥

गाँव-गाँव श्मशान सा लागन, हर मानव क्रांतिकारी है।
जहाँ बंदूक बन गए खिलोने, सेज सभी पर भारी है।
जहाँ सवेरा धमाके करता, रुदन करती शाम है॥
क्रंदित है.....

मौत जहाँ दुनिया बदलती, लाल ध्वजा कल्याणी है।
गोली, बारूद, खूनी तांडव, गाती सूरज की परछाई है।
महकती हवा जहाँ की खूनी, बंगाल है, नंदीग्राम है॥
क्रंदित है.....

जिसके काडर सेज भूमि में, मर्डर करती माकपा है।
जहाँ किसानों की मौत पर rajneeti करती ममता है।
जीवन का आदर्श जहाँ, दोषारोपण है, नंदीग्राम है॥
क्रंदित है.....

भाजपा, माकपा और जहाँ, trinmul सहित दल वाम है।
मौत किसान की, दिन में प्रदर्शन, जश्न मनाती शाम है।
सत्ता पाने की खातिर, न परवाह किसी की जान है॥
क्रंदित है.....

कविता

No comments: