11/25/2007

मेरी तस्वीर




देख भाई इन्सान कैसी सूरत दी भगवान

3 comments:

Sanjay said...

जम रहे हो गुरू.... इतनी गंभीरता क्‍यों ओढ़ रखी है चेहरे पर? सब ठीक तो है ना?

विनीत उत्पल said...

शुक्रिया, मेरे बलाग पर आने के लिये.

अविनाश वाचस्पति said...

आपकी हमारी सबकी वीरभूमि है। यह कंप्यूटर, तलवार हैं ऊंगलियां और अंगूठा . इसे भी कोई नाम दो विनीत। हर पल के लिए उत्पल, पल पल, विनीत उत्पल।