1/24/2008

ख़त्म हुआ टनाटन, घोषित हुआ भारत रत्न

आखिरकार भारत रत्न की घोषणा हो ही गयी। इतना वाद-विवाद होने के इतर यह सम्मान ऐसे शख्सियत को दिया गया, जिसने देश में ऐसा काम किया जिससे पिछले पंद्रह साल में किसी भी राजनीतिक और सामाजिक समीकरण को लीक से हटने नही दिया। सरकार द्वारा दौउद इब्राहीम को भारत रत्न से सम्मानित करने के फैसले के बाद सभी नेताओं और अभिनेताओं के मुहं पर ताला लग गया है।
सूत्रों के मुताबिक इस बात भारत रत्न की होड़ में जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी, ज्योति बसु, काशीराम, बाला साहेब ठाकरे सहित ऐरे-गेरे नेता इसे पाने की होड़ में शामिल हो गए थे कि समिति को इस के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि इस बार गाजर-मुली की तरह प्रधानमंत्री के पास नेताओं के अनुरोध को देखते हुए केन्द्र सरकार के पास अत्मसंकट की समस्या आ गयी थी।
जानकारों के अनुसार, इस बार इन टूट पुन्ज्ये नेताओं को छोड़ ऐसे व्यक्ति को दी गई, जिसने सही मायने में देश के सेवा की। इस क्रम में छोटा राजन, अबु सलेम सहित और भी कई नामों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में वीरप्पन के नाम पर भी चर्चा हुई, लेकिन अहिन्दी भाषी होने के कारण और उसके मर जाने के कारण समिति सदस्यों ने इस नाम पर गंभीर नही huve।
समिति सदस्यों ने बताया कि दौउद ने ना सिर्फ भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अमन और चैन का रास्ता दिखाया है। १९९२ ऐसा मुम्बई बम विस्फोट के बाद सिर्फ गुजरात में दंगा हुआ, नही तो पहले हर साल पूरे देश में अक्सर दंगा होता रहता था। दौउद का आतंक इस कदर रहा कि अमेरिका भी उसे खोजने में लगी रही। वह तो पाकिस्तान का भला हो जिसने उसके रहने-खाने की व्यवस्था कर दी।
माना जा रहा है कि जिस तरह भगत सिंह, चन्द्रशेखर सहित को अंग्रेज आतंकवादी मानती थी उसी तरह दौउद को अभी तक की सभी सरकार आतंकी मानती रही है। सरकार के सूत्रों का मानना है की जल्द ही दौउद, छोटा राजन सहित दुसरे समाज सेवी की जीवनी पाठ्य पुस्तक में पढ़ने को मिलेगी। उनकी आदमकद तस्वीर संसद में भी लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।