2/06/2008

वश चले तो कर दें हिंदी की हत्या

वश चले तो कर दें हिंदी की हत्या

गीतकार को साहित्यकार मानने के मुद्दे पर दिलीप मंडल की प्रतिक्रिया जायज है की वश चले तो संस्कृत की तरह हिंदी की भी हत्या कर देंगे। पवित्र और शुद्ध बनाकर मार डालेंगे। जहाँ तक संस्कृत की बात है, यहाँ ज्योतिष विषय अहम हो जाता है।

ज्योतिष दो तरह के हैं, एक फलित तो दूसरा गणित। फलित ज्योतिष में जहाँ ग्रहों सहित तमाम ब्रहमांड में होने वाले घटनाओं से होने वाले फलों की जानकारी होती है। इसके बल पर हस्त रेखा, कुंडली देखने वालों का पेट भरता है। नेताओं, अधिकारियों या बडे लोगों के हाथों में पत्थर सहित तमाम माला isee का फल है। ज्योतिष के नजर में इससे ज्यादा महत्त्व नही दिया जाता है।


वहीं, गणित ज्योतिष के तहत ग्रहों के पृथ्वी, सूर्य की छाकर लगाने और सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं का अध्ययन किया जाता है।

यहाँ इस आधार पर की हमारी सभ्यता और संस्कृति के बात या तो संस्कृत में मिलती है या तमिल में। सभी ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए, तो क्यों नही हिन्दी के तथाकथिक पैरोकार ज्योतिष की ही तरह और साहित्य को अपने में समावेश क्यों नही कर सकते। चलिए, जरा दिलीप मंडल जी से रूबरू होते है... विनीत

हिदी का ब्राह्मणवाद जाति निरपेक्ष है। ब्राह्मणवाद को अगर जातिवाद का समानार्थी मानें तो ये बींमारी सभी जातियों में है। आपको किस विश्वविद्यालय में नौकरी मिलेगी ये जातिवाद और चेलावाद से ही तय होना है। और ऐसा करने वाले सिर्फ ब्राह्मण नहीं हैं। ये जरूर है कि सवर्ण जातियों को ऐसा अनाचार करने का मौका ज्यादा मिला है और इसके ऐतिहासिक और समाजशास्त्रीय कारण हैं।

इतना तय है कि ऐसे लोग हिंदी के दुश्मन हैं, समाज के भी दुश्मन हैं और दरअसल खुद के दोस्त भी नहीं है। उनका वश चले तो वो संस्कृत की तरह हिंदी की भी हत्या कर देंगे। पवित्र और शुद्ध बनाकर मार डालेंगे। हमारा सौभाग्य है कि पूरे हिंदी संसार के वो 5 परसेंट के भी मालिक नहीं हैं। सभी विश्वविद्यालयों के हिंदी विभाग मिलकर सालभर में जितनी नौकरी देते हैं, उतनी और उससे ज्यादा मालदार नौकरियां हिंदी के बाकी क्षेत्रों में हर दिन मिलती हैं। जाति को इन जगहों में पूछा नहीं जाता, ऐसा तो नहीं है। लेकिन यहां विविधता ज्यादा नजर आ रही है।

हिंदी अब मीडियाकर्मियों, विज्ञापन बनाने वालों, मनोरंजन व्यवसाय से जुड़े लोगों के हाथों में है और पहले से ज्यादा सुरक्षित है। हिंदी की इतनी अच्छी स्थिति कभी नहीं थी। तो जश्न मनाइए हिंदी में ब्राह्णणवाद की मौत का और जश्न मनाइए हिंदी के आजाद होने का।

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