6/21/2008

पंगेबाज ने भी लिखा था प्रेम पत्र



मैं पंगे बाज से पंगे नही लेना चाहता था। लेकिन क्या करूँ वह सोचते हैं की उनकी रद्दी में ही प्रेम पत्र है। आज जब वह लड़का पंगे बाज के घर से कबाड़ी लेकर जा रहा था, तो रस्ते मैं मिल गया। कहा पंगे वाज के घर से आ रहा हूँ। उसने जो कहानी बताई, सुन कर मैं सन्न रह गया। लेकिन सब कुछ बस में तो नही होता। दया आती है और हंसी भी। सुनकर की कैसे हैं हमारे पंगे बाज।
तो बात यह है की पढ़ाई दे दिनों में हमारे पंगे बाज भी खूब इश्क लड़ाया करते थे। संयोग वश एक प्रेम पत्र रामविलास जांगिड के हाथो लग गया था। बस फ़िर क्या था, उन्होंने उसे अपने नम से अखबार में प्रकाशित कर दिया।
यह अलग बात है की इस पत्र को लेकर अभी पुष्टि नही हो पाई है, लेकिन पढने पर सारा मामला सामने आ जाएगा।

7 comments:

maithily said...

बिल्कुल सही बात है
इस पत्र की कापी पंगेबाज जी के घर पर पहुंचा देनी चाहिये ताकि उनके घर पर दे दनादन तबला बज सके

Ashok Pande said...

चिठ्ठी जिसने भी लिखी है अपना ही भाई लगता है. मुझे तो आज तक कोई चैक नहीं आया. धमकियां ज़रूर आईं अलबत्ता डिम्पू के नए-नए झंडामलों की तरफ़ से मगर अपन डरे नहीं ... लगे थे ... लगे है ... लगे रहेंगे ... इंशाअल्लाह! आह आह ... इंतकाल!!!

बहुत बढ़िया.

Rajesh Roshan said...

मुझे तो केवल हँसी आ रही है...

Udan Tashtari said...

हाय!! मेरे पंगेबाज, अब क्या होगा. :)

मैथली भाई, शुभ कार्य आपके शुभ हाथों से हो जाये. हा हा!!

तबला सुनने हम आप साथ चलेंगे. कार्यक्रम के बाद पंगेबाज को साथ लिवा लायेंगे आखिर मित्र हैं अपने.

बढ़िया लाये विनीत भाई.

anitakumar said...

पंगेबाज से पंगा भारी पड़ सकता है
तबला पंगेबाज के घर बजने के बदले
कहीं और भी बज सकता है,

अरुण said...

विनीत जी धन्यवाद पत्र छापने का, लेकिन आप हडबडी मे ये भूल गये ये वही पत्र है जो आपने डिंपू को लिखा था और मुझसे राय लेने के लिये आप मेरे घर पर मुझे पढवाने आये थे,आप छापने की जल्दी मे ये भी भूल गये कि आप जब दूसरा पत्र मुझ से लिखवाकर ले गये थे तो ये आप यही भूल गये थे, जो मैने पिछले दिनो जांगिड जी को छापने को दे दिया था, मेरी चिंता छोडिये( मै अपनी सभी प्रेमिकाओ के लिये पत्र आपकी भाभी से ही लिखवाता था जी ) पहले घर जाते समय एक अच्छा सा हेल्मेट ले लीजीयेगा. भाभीजी का फ़ोन आया था .पोस्ट पढते ही उनको आप पर शक हो गया था(शीनो डिंपू वही है ना जो उस दिन आपको और भाभीजी को माल मे मिली थी).बाकी कमी हमने पूरी करदी है,अबकी बार नर्सो से दूरी बनाकर रखना , उम्मीद है पिछली बार की याद दिलाने की जरूरत तो नही होगी :)आपका पंगेबाज

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

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respected .......!
for n/a pl.....z..zzzzzzz?