6/24/2008

पंगेबाज से पंगा, बीबी से तलाक

पंगेबाज से पंगा, बीबी से तलाक

मैंने पहले भी कहा था की पंजेबाज से पंगे नही लेना चाहता था। पिछले पोस्ट में जो मैंने पंगेबाज का प्रेम पत्र प्रकाशित करना और पंगेबाज का जबाब मुझे काफी मंहगा पड़ गया। उनका जबाब मेरे बीबी यानी अरुणजी की भाभी ने पढ़ लिया और मेरे घर पहुँचने पर तो कोहराम मच गया। आखिरकार नौबत आज यहाँ तक आ पहुँची है कि ३१ जून को पंगेबाज के शहर फरीदाबाद की अदालत में तलाक़ होने वाला है। इस मौके पर अरुणजी मेरी घर में आग लगाने की खुशी में एक पार्टी देने वाले है। इस मौके पर आप सभी आयें तो अरुणजी को खुशी होगी और उनकी आत्मा को भी शांती मिलेगी। अब जब तलाक हो ही रहा है तो अपने भाई सामान पंगेबाज से अनुरोध है की वह मेरे लिए अपनी पुरानी खूसट बीबी जो अभी मेरे साथ है, उसे घर में पनाह दें और मैं निश्श्न्त होकर किसी और पर फनाह हो सकूँ।
तो दोस्तों पहले तो यह जान लें कि किस तरह पंगेबाज ने पंगा किया....
उनका पत्र पढ़ें.....

विनीत जी धन्यवाद पत्र छापने का, लेकिन आप हडबडी मे ये भूल गये ये वही पत्र है जो आपने डिंपू को लिखा था और मुझसे राय लेने के लिये आप मेरे घर पर मुझे पढवाने आये थे,आप छापने की जल्दी मे ये भी भूल गये कि आप जब दूसरा पत्र मुझ से लिखवाकर ले गये थे तो ये आप यही भूल गये थे, जो मैने पिछले दिनो जांगिड जी को छापने को दे दिया था, मेरी चिंता छोडिये( मै अपनी सभी प्रेमिकाओ के लिये पत्र आपकी भाभी से ही लिखवाता था जी ) पहले घर जाते समय एक अच्छा सा हेल्मेट ले लीजीयेगा। भाभीजी का फ़ोन आया था .पोस्ट पढते ही उनको आप पर शक हो गया था(शीनो डिंपू वही है ना जो उस दिन आपको और भाभीजी को माल मे मिली थी).बाकी कमी हमने पूरी करदी है,अबकी बार नर्सो से दूरी बनाकर रखना , उम्मीद है पिछली बार की याद दिलाने की जरूरत तो नही होगी :)
आपका पंगेबाज

दूसरा देखें वो कितना खुश हैं...

विनीत जी हमारे कारण आपके घर मे आपके साथ पंगे हुये , यानी हम धन्य हुये कृतार्थ हुये भाबीजी द्वारा ,हमारी तमाम सहानूभुती आपके साथ है पर तमाम अनूग्रह के साथ आप भाभीजी तक हमारा धन्यवाद ज्ञापन पहुचा दे कि उनकी इस कृत्य के कारण ही हमे अपने ब्लोग नाम अर्थार्थ पंगेबाज को यथार्थ रूप मिला , इसी से तो ब्लोगजगत मे हमारी धाक बनेगी जी वर्ना क्या फ़ायदा पंगेबाज नाम रखने का , आप घर मे हमरी वजह से घटित घटना को ब्लोग पर जरूर बताये ताकी सभी को पता चल जाये :०,
धन्यवाद सहित
आपका
अनुज :) -- अरूण अरोरा

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देखा अपने आख़िर मेरे घर मी नही रहने के दौरान मेरी पत्नी आख़िर पंगेबाज से फोन पर क्यों बात करती थी। जबकी उसके पास jo मोबाइल है उस पर फोन किया जा सकता है लेकिन उससे फोन नही किया जा सकता। इस का मतलब यह कि मेरे घर से बहार रहने के दौरान पंगेबाज क्या गुल खिला रहे थे वो भी मेरे घर में इसका उन्होंने ख़ुद ही स्वीकार किया है।
अब आपको इंसाफ करना है, मेरे लिए दूसरी बीबी का इंतजाम करना है। हाँ, मेरे दस साल के बेटे (पता नही वो मेरा है या पंगेबाज का) जिसे मैं पल रहा हूँ, वह कहाँ रहेगा उसका फ़ैसला या तो आप लोग कर दे या उस दिन पंगेबाज के शहर मी होगा। मैं सोच रहा हूँ कि उसे पंगेबाज के यहाँ छोड़ दूंगा, आपकी क्या राय है...



(यहाँ लिखी गयी सारी बात महज फंतासी है, सच्चाई से कोई लेना देना नही है, इस कारण कोई दिल पर न लें... विनीत )

2 comments:

Udan Tashtari said...

चलिये, पंगेबाज की पंगेबाजी पुनः सफल रही. आपसे फार्मेल्टी में सहानभूति दर्शा देते हैं. :)

कामोद Kaamod said...

चेतावनी- उस जीव का नाम ही पंगेबाज़ है तो पंगा होना स्वभाविक है. :))
दिल पे मत ले यार :)