8/03/2009

यह स्वयंवर था या नाटक

टीआरपी बढ़ाने के खेल में रविवार को उदयपुर शहर के बहने तमाम टीवी दर्शकों ने वह देखा, जिसका तसव्वुर उसे सपने में भी नहीं था। उसने सोचा भी नहीं था की राखी सावंत 'स्वयंवर' में इलेश परुजनवालाके गले में हर तो डालेंगी लेकिन इस जुमले के साथ की उन्हें समझने को थोड़ा वक्त चाहिए। समझने को, यानि कोई जरूरी नहीं की वह इलेश की जीवनसंगिनी बनें ही। इस टीवी नाटक से टीआरपी तो बेशक बढ़ गया लेकिन जबरदस्त ड्रामे के बाद। राखी सावंत ने एक साथ पञ्च लोगों के लिए करवाचौथ का ब्रत रखा, तीन को फाइनल के लिए बुलाया और इलेश के गले में हर और उनकी उंगली में अंगूठी पहना दी।
'स्वयंवर' के बहने अभी तो हमारी सगाई हुई है। मुझे समझने को थोड़ा वक्त चाहिए।'

स्वयंवर तो सीता का भी हुआ था। एक से बढ़कर एक भूप उसमें आए थे। स्वयंवर की समाप्ति पर जब सीता ने राम के गले में माला डाली, तब से लेकर धरती की गोद में समाने तक वह राम की रहीं। उन्होंने स्वयंवर के बाद सोचने-विचारने की कोई तारिख नहीं छोड़ी, क्योंकि ऐसा करना परम्परा और स्वयंवर के स्थापित नियमों के सर्वथा विरूद्व होता।
स्वयंवर तो सीता का भी हुआ था। एक से बढ़कर एक भूप उसमें आए थे। स्वयंवर की समाप्ति पर जब सीता ने राम के गले में माला डाली, तब से लेकर धरती की गोद में समाने तक वह राम की रहीं। उन्होंने स्वयंवर के बाद सोचने-विचारने की कोई तारिख नहीं छोड़ी, क्योंकि ऐसा करना परम्परा और स्वयंवर के स्थापित नियमों के सर्वथा विरूद्व होता।
टीआरपी बढ़ाने का फार्मूला तो चल निकला लेकिन इस तिकड़म में दर्शकों के रहे-सहे कौतूहल की बलि चढ़ गई। इस पूरे मामले में तमाम यक्ष प्रशन बिखरे पड़े हैं जिनका जवाब देते बाजार में बने रहने के तिकड़म की हवा खिसक जायेगी। मसलन, इलेश के उस अधेड़ माँ-बाप का क्या होगा जो बिल्कुल नहीं चाहते थे लेकिन बेटे की खुशी के लिए इस मौके का गवाह बनने सात समंदर पार आने के लिए मजबूर हुए? इलेश का क्या होगा ? उन सपनों का क्या होगा जो राखी के बहने इलेश ने देखे थे ? उस कौतूहल का क्या होगा जिसने टीवी दर्शकों को अपने जिद में बांधे रखा ? शहर तो बस जायेंगे लेकिन उन दिलों का क्या होगा जिन्हें राखी सावंत के बाजार दर्शन ने निगल लिया ?
टीआरपी, प्रचार और पैसा की तिकडी ने इस पूरे एपिसोड के जरिये विवाह की सामाजिक मर्यादा के साथ-साथ भारत की सामाजिक संस्कृति और सभ्यता को भी तार-तार किया है। राखी सावंत का 'स्वयंवर' और इससे जुड़े तमाम एपिसोड सिर्फ़ और सिर्फ़ दर्शकों की आखों में धूल झोंकते रहे। लोग टीवी देखते रहे और चैनल की टीआरपी बढती गई और इसके साथ पैसों का खेल चलता रहा। पूरे स्वयंवर के दौरान दूल्हा बनने का सपना देख रहे लड़कों ने राखी के लिए कवितायें लिखी, गाने गए, डांस किए और फ़िर राखी के माना करने पर ऑन रिकार्ड या ऑफ़ रिकार्ड गाली-गलौच से भी बज नहीं आए। टोरेंटो में ऐक्टिंग एकेडमी से ग्रेजुएशन करने वाले इलेश और आयटम गर्ल राखी सावंत के बीच सगाई का यह ड्रामा आम दर्शकों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने में सफल रहा, इसमें कोई शक नहीं।
(राष्ट्रीय सहारा से साभार)

1 comment:

anupam mishra said...

सिर्फ एक पैसा कमाऊ नौटंकी...