9/09/2009

मुझे लड़नी है एक छोटीसी लड़ाई

आखिर क्यों होती है लडाई अपनों से, अपनों में, क्यों हम नहीं लड़ते दूसरों से। अपनों से लड़ते हैं, थोडी देर चुप रहते हैं, न होती है एक-दूसरे से बातचीत। लेकिन वह समय होता है घंटों का, दिनों का। लेकिन फिर एक-दूसरे के बिना मन नहीं लगता। भले न हो मुलाकात। मोबाईल तो है न। डायल किया, रिंग हुई और फिर बातचीत। थोडी देर बातचीत शांत और शुकून सा लेकिन फिर वाही ताने और बहसें। कसम खाई जाती है कि आज और अब के बाद फोन नहीं करना। इधर से भी यही बात दोहराई जाती है, फिर फोन कट...
लेकिन सुबह कि बात शाम में कोई याद रखता है तो दूसरा भूल जाता है। दूसरा याद रखता है तो पहला भूल जाता है। रात कि बात सुबह होते ही अँधेरे में विलीन हो जाता है और सूर्य की नई किरण के साथ फिर नई सुबह होती है दोस्ती की। फिर इंतजार होता है फोन आने का, आग आख़िर दोनों तरफ लगी है। तभी तो पिछले छह माह से यह क्रम चलने के बाद भी अक्सर बातें होती हैं दोनों के बीच। हालचाल पूछते हैं दोनों। दोनों की रातें एक जैसी ही कटती हैं, करवट बदलते-बदलते हुए। दिन होते ही दोनों लग जाते हैं अपने-अपने कामों में। दोनों कामों में ऐसे खो जाते हैं की दुनियादारी का ख्याल ही नहीं रहता। काम के वक्त दोनों रहते मस्त लेकिन अकेले होते ही याद आती है एक-दूसरे की।
'कैसे मंजर सामने आने लगे हैं, गाते-गाते लोग चिल्लाने लगे हैं'
एक बोलता है सच्ची बात कि उसके लिए उसका प्रोफेशन ही सब-कुछ है लेकिन वह होता है पक्के तौर से झूठ। क्योंकि यदि ऐसा होता तो फिर दुनिया की बातें उसे याद कहाँ रहती। अपने दोस्त की हर बात क्यों याद रहती। पूरे दो साल के दौरान अपने दोस्त के साथ रहे हर पल कैसे याद रहते। हर प्यार और झगडे के रवानगी कैसे याद रहती। दूसरा कहता मैं तो पिछले दो साल से सिर्फ तुम्हें जानता हूँ।
कब तक चलेगा यह दोस्ती और झगडे का मामला। दोनों एक दूसरे पर जमकर दोषारोपण करते हैं। यहाँ तक की गालियाँ भी अनचाहे मुंह से निकल जाती है। फिर भी एक दूसरे के बिना दोनों को मन नहीं लगता। आखिर कब तक चलेगा यह। आखिर कब आएगा जब दोनों सारी गलतफमियों, शिकायतों को किसी आग में जलाकर एक हो दुनिया के सामने होंगे। क्योंकि मन में एक प्यार तो है ही भले ही कितना किसी पर दोषारोपण करें, झगडा करें, गुस्सा करें।
मुझे लड़नी है एक छोटी—सी लड़ाई
एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ
कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा.
मुझे लड़ना नहीं अब...

1 comment:

Mrs. Asha Joglekar said...

ladaee to achchee bat bhee nahi hai. ho bhee jaye to jaldi se sulah kar lena chahiye.