9/18/2009

ब्लॉग से पोर्टल तक: कुमुद सिंह

ब्लॉग के जरिए जिस प्रकार हिंदी को ऑनलाइन बढ़ावा मिल रहा है, ठीक उसी तेजी से कई आंचलिक भाषाएं भी ब्लॉग जगत में कदम बढ़ा रही हैं। इतना ही नहीं, जब आंचलिक भाषा के ब्लॉगों को पढने वालों के तादाद बढ़ी तो पोर्टल शुरू किया जाना जायज ही था।
ऐसे में कुमुद सिंह अभी तक मैथिली भाषा में पहला ई-समाचार पत्र ‘समाद’ वर्डप्रेस डॉट कॉम के सहयोग से निकल रही थीं, उसे पोर्टल का रूप दे दिया है। इस अख़बार कि खास बात यह ही कि इसके सभी सदस्य महिलाएं हैं। एक ब्लॉग का पोर्टल के तौर में पाठकों के सामने लाना मैथिली जगत में क्रांति ही कही जायेगी क्योंकि 24 जनवरी, 2008 से इसे शुरू किये जाने के बाद अभी तक प्रकाशित 25 अंक तक कुल हिट्स करीब डेढ़ लाख रहा है।
संपादक कुमुद सिंह बताती हैं कि इस ऑनलाइन समाचार पत्र को निकालने में छह महिलाओं का हाथ है। दिलचस्प बात यह है कि किसी भी महिला सदस्य ने पत्रकारिता का पाठ किसी संस्थान में जाकर नहीं पढ़ा। चूकि ब्लॉग से पोर्टल में समाद को बदला गया है, और इसमें काफी तकनीक कि जानकारी जरूरी होती है, इस कारण फिलहाल सभी सदस्य दिल्ली में पोर्टल के जरिये खबरों को प्रकाशित से लेकर इससे जुडी तमाम जानकारियों की ट्रेनिंग ले रही हैं. समाद का मैथिली में अर्थ होता है संदेश। इस खास तरह के समाचार पत्र रूपी ब्लॉग की संचालक महिलाओं का कहना है कि इसके जरिए वे बिहार की एक अलग छवि लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसी कई खबरें, जिसे समाचार पत्र या चैनलों पर नहीं देखा जा सकता है, उसे आप समाद में पढ़ सकते हैं।
मसलन, बिहार के मधुबनी जिले के ककरौल गांव में पांच इंटरनेट कैफे किस प्रकार यहां के युवाओं में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांति लाने का प्रयास कर रहे है, इस संबंध में यहां एक खास रिपोर्ट है। विश्व में मैथिली भाषी लोगों की संख्या लगभग तीन करोड़ है। हालांकि, समाद के अलावा भी मैथिली में कई ब्लॉग सक्रिय हैं, जहां साहित्य संबंधी ढेर सारी पोस्ट पढ़ने को मिल जाएगी, लेकिन समाद उन ब्लॉगों से भिन्न है। यहां ब्लॉग को समाचार पत्र के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। समाद को प्रकाशित करने को लेकर कुमुद सिंह कहती हैं कि इसे प्रकाशित करने में प्रीतिलता मलिक, ममता शंकर, सुषमा और छवि का काफी योगदान है।
शुरूआती दिनों को याद करते हुए कहती हैं कि पति के ऑफिस जाने के बाद खाली समय मिलने पर घर का खालीपन काटता रहता था. कालोनी में रहने वाली उन सभी महिलाओं कि यही स्थिति थी जो घर में रहती थी. इस कारण हमने कुछ नया करने का ठाना. एक कम्पूटर का जुगाड़ किया, इंटरनेट लगाया और बातों-ही-बातों में पहले ब्लॉग बनाया और फिर देश-दुनिया के साथ-साथ आंचलिक खबरों की जानकारी विश्वजाल पर देते रहे। दो साल तक ठीक-ठाक चलने के बाद लगा कि इसे पोर्टल का रूप दिया जाय तो बेहतर होगा. इसका फायदा यह हुआ कि जो समाद अभी तक पाक्षिक तौर से पाठकों को मिल रहा था वह आब हमेशा अपडेट होता रहेगा।

2 comments:

बी एस पाबला said...

वाह, बढ़िया
बधाई व शुभकामनाएँ

बी एस पाबला

संगीता पुरी said...

कुमुद सिहि जी का प्रयास सराहनीय है .. आनेवाले समय में उनकी देखा देखी अन्‍य क्षेत्रीय भाषाओं के पोर्टल भी सुनने को मिलेंगे .. उन्‍हे बधाई !!