10/04/2009

क्या आप कल्पना बहन सोनी को जानते हैं

महिला पुरूष के साथ कदमताल मिलाकर चल रही हैं। इसका अहम उदाहरण अहमदाबाद की 40 वर्षीय कल्पना बहन सोनी हैं। भारी वाहनों को चलाने का जज्बा पालने वाली कल्पना देश की ऐसी महिला हैं, जिन्होंने (जनमार्ग) बीआरटीएस की पहली महिला ड्राइवर बनने का गौरव हासिल किया है। वह इन दिनों अहमदाबाद में राणिप से चंद्रनगर के बीच प्रायोगिक रूप से शुरू किए गए जनमार्ग पर बस दौड़ा रही हैं।
सिंगापुर में महिलाओं को डबल-डेकर बस चलाते देख कल्पना बहन सोनी के दिल में ख्याल आया कि इस तरह का प्रयास वह भी कर सकती है और उन्होंने अपने खवाब को पूरा कर दिखाया।

मारूति की अधिकृत ट्रेनर कल्पना बहन 1987 से लोगों को ड्राइविंग के गुर सिखा रही हैं। उनसे ड्राइविंग सीखने वालों की संख्या कुछेक नहीं बल्कि 1700 है। दिलचस्प बात है कि जनमार्ग-अहमदाबाद ने जब कल्पना बहन को ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए तलब किया तो वह चाहतीं तो बस चलाकर अपनी दक्षता साबित कर सकती थीं। लेकिन कल्पना बहन को शुरू से कुछ अलग करने की चाह थी, सो उन्होंने बस की बजाय ट्रक चलाकर अपनी क्षमता साबित की।
ऐसा नहीं है कि कल्पना ने शुरू से ही सोच रखा था कि वह ड्राइविंग ही करेंगी। जब वह सिंगापुर गईं तो उन्हें इस प्रोफेशन में आने की प्रेरणा मिली। वह 2008 में वहां गई थीं। वह बताती हैं कि उन्हें स्वयं उम्मीद नहीं थी कि दोस्तों के साथ सैर के लिए सिंगापुर जाने पर उनमें कुछ हटकर कर गुजरने की ललक पैदा होगी। उन्होंने वहां महिलाओं को डबल-डेकर बस चलाते देखा तो उनके अंदर गाड़ी चलाने की इच्छा जागी। सिंगापुर से लौटने के बाद कल्पना ने अपनी अंदर की इस ललक को समय के साथ खत्म नहीं होने दिया। बल्कि वह भारी वाहन चलाना सीखने लगीं और बस ड्राइवर बनने के ख्वाब को साकार करने के लिए जी-जान से जुट गईं। कल्पना का संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ।
लाइसेंस को लेकर भी उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिसके मूल में उनका महिला होना ही अहम था। कल्पना बताती है कि जब उन्होंने भारी वाहन चलाने के लिए अहमदाबाद आरटीआ॓ में आवेदन किया तो कार्यालय के अधिकारी कौतूहलवश उन्हें देखने कार्यालय से बाहर आ गए थे। उनका मानना था भूलवश किसी महिला ने भारी वाहन चलाने के लिए आवेदन कर दिया होगा। उन्होंने जरूर दुपहिया के लाइसेंस के लिए आवेदन किया होगा। लेकिन मामला सामने आने पर उनका चेहरा देखने लायक था।
सोनी का मानना है कि महिला सशक्तिकरण के बावजूद महिलाओं को उनके हुनर के प्रयोग की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि देश के सामाजिक ढांचे में त्रुटि होने के कारण ही महिलाओं की यह स्थिति है। जब तक महिलाएं जागरूक नहीं होंगी तब तक कुछ नहीं हो सकता है। बावजूद इसके कल्पना उम्मीद के सुनहरी उजालों से भरी हैं, उनका मानना है कि जल्द ही भारतीय महिलाओं के दिन भी फिरेंगे, वे आत्मसम्मान के साथ धीरे-धीरे जीना सीख रही हैं।

3 comments:

Varun Kumar Jaiswal said...

प्रेरणादायक |

RAJNISH PARIHAR said...

महिलाओं के लिए सम्मान की बात है ये!आज सभी जगह वे अपना परचम लहरा रही है...

Anil Pusadkar said...

उनकी हि्म्मत और मे्हनत को नमन करता हूं।।