7/10/2010

मेरी भी कविता की किताब आ गयी है

अप्रैल महीने में ही मेरी कविता की किताब आ गई थी। लेकिन प्रचार को लेकर संकोच कर रहा था। जब देखा कि आमिर ख़ान अपनी बीस करोड़ की फिल्म बेचने और रवीश दो सौ पचीस रुपये की किताब बेचने के लिए सब कुछ कर रहे हैं तो मुझे लगा कि क्यों ना मैं भी अपनी एक सौ साठ रूपये की किताब की मार्केटिंग करूँ। आप ख़रीद कर पढ़ेंगे तो अच्छा लगेगा। सभी कविता मैथिली भाषा में है। इसे छापा है श्रुति प्रकाशन ने। संपर्क है- 011-२३२८८३४१, ०९९६८१७०१०७, www.shruti-publication.com.

3 comments:

रजनीश के झा (Rajneesh K Jha) said...

बधाई……

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

विनीत जी,
देर से ही सही। कविता पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई स्वीकारें।
विमोचन करवाएँ!

उन्मुक्त said...

बधाई।